आनुवंशिकी

Sickle cell disease Nurses need better training says health union
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मेंडेलीय विकार क्या है। हिमोफिलिया क्या है। वर्णांधता क्या है। तथा सिकल-सेल एनेमिया क्या होता है।

मेंडेलीय विकार (Mendelian disorders):- एकल जीन के उत्परिवर्तन से मेंडेलीय विकार निर्धारित होता हैं। ऐसे विकार की वंशागति मेंडल के सिध्दांत के अनुसार होती है। इसे वंशावली विश्लेषण द्वारा खोजा जा सकता है। जैसे – हीमोफीलिया, वर्णांधता, सिकल-सेल एनीमिया, फिनाइलकिटोन्यूरिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस, थैलेसिमिया आदि मेंडेलीय विकार है। हिमोफिलिया (Haemophilia) :- यह एक लिंग सहलग्न अप्रभावी […]

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उत्परिवर्तन (Mutation) एवं इसके प्रकार – Hindi notes (Print pdf)

उत्परिवर्तन (Mutation) :- उत्परिवर्तन वह क्रिया है जो DNA के अनुक्रमों (sequences) में बदलाव ला देता है, जिसके परिणामस्वरूप जीवों के फीनोटाइप तथा जीनोटाइप लक्षणों में अचानक परिवर्तन आ जाता है। उत्परिवर्तन के प्रकार :- उत्परिवर्तन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं :- (1) गुणसूत्रीय उत्परिवर्तन (Chromosomal mutation) :- गुणसूत्रों की संख्या तथा उनके संरचना

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मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है! (Sex determination in humans) :-

मानव में लिंग निर्धारण (Sex determination in humans) :- मानव के प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं जिसमें 22 जोड़े को अलिंग गुणसूत्र (Autosomes) तथा अंतिम 23वें जोड़ा को लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) कहते हैं। मादा का लिंग गुणसूत्र XX तथा नर का XY होता है। लिंग निर्धारण नर के लिंग गुणसूत्रों

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क्राॅसिंग ओवर
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क्रॉसिंग ओवर और क्रॉसिंग ओवर के महत्व के बारे मे बताएl

क्राॅसिंग ओवर (Crossing Over) वैसी प्रक्रिया जिसमें एक गुणसूत्र पर स्थित जीन्स का एक समूह समजात गुणसूत्र पर स्थित समान जीनों के समूह द्वारा स्थान परिवर्तन कर लेता है, उसे विनिमय या क्रॉसिंग ओवर कहते हैं। क्रॉसिंग ओवर का महत्व (Importance of Crossing Over) क्रॉसिंग ओवर के महत्व निम्नलिखित हैं :

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मेंडल की वंशागति नियमों के अपवाद – अपूर्ण प्रभाविता, सहप्रभाविता, बहुविकल्पता तथा सहलग्नता का वर्णन।

मेंडल की वंशागति नियमों के अपवाद (Exceptions to Mendel’s Law of Inheritance) :- अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete dominance) :- जब विपरीत लक्षणों के जोड़े में एक लक्षण दूसरे लक्षण पर पूर्ण प्रभावी न होकर एक – दूसरे पर अपूर्ण रूप से प्रभावी हो जाते हैं अर्थात दोनों अपने-अपने लक्षण को आंशिक रूप से प्रकट करते हैं

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मेंडल की सफलता के कारण क्या थे?(Reasons for Mendel’s success)

मेंडल की सफलता के कारण निम्नलिखित थे 1. मटर के पौधे का चयन (Selection of pea plant) :- मेंडल ने अपने प्रयोग के लिए केवल मटर के पौधे का ही चयन किया, क्योंकि 2. कार्य प्रणाली :- मेंडल द्वारा चयनित सात जोड़े विपरीत लक्षण :- (a) गोला (round) तथा झुर्रीदार (wrinkled) बीज (b) पीला (yellow)

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आनुवंशिकता, एकसंकर क्रॉस, द्विसंकर क्रॉस, मेंडल के वंशागति नियम तथा वंशागति के गुणसूत्रीय सिद्धांत का वर्णन।

आनुवंशिकता (Heredity) :- संतानो में पैतृक लक्षणों के संचरण को आनुवंशिकता कहते हैं। यह संचरण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जनकों से युग्मको (gametes ) के द्वारा होता है। आनुवंशिक लक्षण :- एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित होनेवाले लक्षण को पैतृक लक्षण या आनुवंशिक लक्षण कहलाते हैं। आनुवंशिकी (Genetics) :- जीव विज्ञान

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डीएनए प्रतिकरण की विधियां क्या क्या हैं। संतत एवं अर्धसंतत प्रतिकरण के बारे में बताएं।

डीएनए प्रतिकरण की विधियां (Methods of DNA Replication) :- डीएनए प्रतिकरण की विधियां निम्नलिखित हैं :– 1. प्रारंभन (Initiation) :- 2. कुंडली का खुलना (Unwinding of Helix) :- 3. प्राइमर स्ट्रैंड्स का निर्माण (Formation of Primer strands) :- 4. नए स्टैंड की लंबाई में वृद्धि (Elongation of new strand) :- संतत एवं अर्धसंतत प्रतिकरण (Continuous

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आरएनए क्या है? संरचना और प्रकार (RNA Structure & Types) – Class 12 Notes in हिंदी। (Print Pdf)

आरएनए (RNA) :- आरएनए (Ribonucleic acid) एक प्रकार का न्यूक्लिक अम्ल है जो कोशिका द्रव्य तथा केंद्रिका में पाया जाता है। आरएनए को प्रथम आनुवंशिक पदार्थ कहते हैं क्योंकि आवश्यक जैवप्रक्रमों जैसे – उपापचयी, स्थानांतरण (ट्रांसलेशन), संबंधन आदि का विकास (evolution) आरएनए से ही हुआ था। कार्य :- आरएनए (RNA) की संरचना :- आरएनए (RNA)

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डीएनए
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न्यूक्लिक अम्ल तथा उसका प्रकार, न्युक्लियोसाइड तथा न्युक्लियोसाइड, डीएनए (DNA) की संरचना तथा उसका प्रकार का वर्णन।

न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acid) :- कोशिका के न्यूक्लियस में क्रोमोसोम के अंदर उपस्थित आनुवंशिक पदार्थ को न्यूक्लिक अम्ल कहते हैं। सन् 1869 में फ्रेडरिक मेशर (Friedrich Miescher) ने मवाद की कोशिका (pus cell) के न्यूक्लियस से न्यूक्लिक अम्ल का खोज किया था। मेशर ने उस अम्ल का नाम न्यूक्लिन (nuclein) रखा था। न्यूक्लिक अम्ल के

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आनुवंशिकी

DNA फिंगरप्रिंटिंग क्या है। DNA फिंगरप्रिंटिंग के क्या उपयोग हैं।

DNA फिंगरप्रिंटिंग :- मनुष्य के डीएनए में पाए जाने वाले क्षार अनुक्रम लगभग 99.9 % एक समान होते हैं, किंतु शेष डीएनए में विभिन्नताए होते हैं, इन विभिन्नताओं का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए जिस विधि का उपयोग किया जाता है उसे DNA फिंगरप्रिंटिंग कहते हैं। DNA फिंगरप्रिंटिंग की विधि :- 3. डीएनए को सीमा

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ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (Human Genome Project) या मानव जीनोम परियोजना क्या है। “HGP” के लक्ष्य, कार्य प्रणाली और मुख्य विशेषताएं क्या क्या हैं।

मानव कोशिका में उपस्थित सभी 46 क्रोमोसोम के संपूर्ण DNA अनुक्रम को पता लगाने, विभिन्न प्रकार के आनुवंशिक रोगों के निदान के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों ने सन् 1990 में एक परियोजना की कल्पना की जिसे ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट / मानव जीनोम परियोजना या HGP कहते हैं। यह योजना अप्रैल 2003 में पूर्ण हुई

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