जीवविज्ञान

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प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

प्राणियों में संरचनात्मक संगठन :- प्राणियों में संरचनात्मक संगठन (Structural Organisation in Animals) के अंतर्गत प्राणियों के शरीर में ऊतकों (Tissues), अंगों (Organs), अंग-तंत्रों (Organ Systems) तथा मेंढक (Frog) की आकारिकी एवं शरीर रचना का अध्ययन किया जाता है। बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाएँ, ऊतक, अंग तथा अंग-तंत्र मिलकर कार्य करते हैं। संरचनात्मक संगठन के स्तर […]

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पुष्पी पादपों का शारीर

पुष्पी पादपों का शारीर (Plant Anatomy): संपूर्ण अध्ययन

पुष्पी पादपों का शारीर (Anatomy) :- पुष्पी पादपों का शारीर (Anatomy of Flowering Plants) अंतर्गत पौधों की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है। इसमें ऊतक (Tissues), ऊतक तंत्र (Tissue System), जड़ एवं तने की आंतरिक संरचना तथा द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) का अध्ययन किया जाता है। ऊतक (Tissue) :- समान उत्पत्ति, संरचना एवं कार्य

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पुष्पी पादपों की अकारिकी

पुष्पी पादपों की बाह्य अकारिकी

पुष्पी पादपों की बाह्य अकारिकी :- पुष्पी पादपों की बाह्य आकारिकी (Morphology of Flowering Plants) में पुष्पी पौधों के बाह्य संरचना एवं रूपात्मक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है। पुष्पी पादप का संगठन :- एक सामान्य पुष्पी पादप दो भागों में विभाजित होता है – चित्र – पुष्पी पादपों की बाह्य अकारिकी। मूल / जड़

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कोशिका की संरचना तथा कार्य

कोशिका (Cell) की संरचना एवं कार्य

कोशिका (Cell) क्या है? उत्तर – कोशिका (Cell) सभी जीवों की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई है। सभी जीव कोशिकाओं से बने होते हैं। इनमें कुछ जीव एक कोशिकीय तो बहुत सारे जीव बहुकोशिकीय होते हैं। कोशिका (Cell) की खोज :- कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) :- 1838 में जर्मन वनस्पति वैज्ञानिक मैथियस स्लाइडेन (Matthias Schleiden) तथा

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प्राणि जगत

प्राणि जगत (Kingdom animalia)

प्राणि जगत (Kingdom animalia) :- प्राणि जगत में सभी जन्तु (Animals) शामिल होते हैं। ये बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक तथा परपोषी जीव होते हैं। ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। ✨ मुख्य विशेषताएँ – प्राणि जगत (Kingdom Animalia) का वर्गीकरण :- संघ (phylum) – पोरिफेरा /

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पादप जगत

पादप जगत (Kingdom Plantae)

पादप जगत (Kingdom Plantae) :- मुख्य विशेषताएँ – बहुकोशिकीय (Multicellular) तथा यूकैरियोटिक होते हैं आवास – जल, नम पत्थर, मिट्टी, कुछ लाइकेन में कवक के साथ भी रहते हैं। 🌱 पादप जगत का वर्गीकरण (Classification of Kingdom Plantae) :- शैवाल (Algae) :- ✨ विशेषताएँ – 📍 उदाहरण – Chlamydomonas, Spirogyra, Ulothrix, Volvox शैवाल का वर्गीकरण

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जीव जगत का वर्गीकरण

जीव जगत का वर्गीकरण (Biological Classification)

वर्गीकरण क्या है? उत्तर – जीवों को उनकी समानता और भिन्नता के आधार पर समूहों में बाँटना वर्गीकरण (Classification) कहलाता है। वर्गीकरण का महत्व (Importance of Classification) :- पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification) :- . एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) द्वारा 1969 में प्रस्तावित। मोनेरा (Monera) :- उदाहरण – बैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) मोनेरा (Monera) का वर्गीकरण :- (1)

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जीव जगत में विविधता जीवविज्ञान

जीव जगत (The Living World)

जीव (Living Organisms) क्या हैं? उत्तर – जीव वे होते हैं जिनमें जीवन के गुण पाए जाते हैं। जीवों की मुख्य विशेषताएँ – 👉 महत्वपूर्ण – निर्जीव वस्तुएँ भी बढ़ सकती हैं (जैसे क्रिस्टल), पर उनमें चयापचय नहीं होता है। चयापचय – जीवों की सबसे महत्वपूर्ण पहचान है। 🔹 जैव विविधता (Biodiversity):- पृथ्वी पर पाए

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जैव प्रौद्यौगिकी एवं उनके उपयोग

नैतिक मुद्दे (Ethical Issues) – Class 12 Biology Notes in Hindi

नैतिक मुद्दे (Ethical Issues) :- मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अन्य जीवों जैसे – चूहा, बंदर आदि पर विभिन्न प्रकार के परीक्षण करता है। इस तरह की परीक्षण के लिए कोई नियमावली नहीं बनी है। इस कारण जानवरों को मानवीय यातना झेलनी पड़ती है। अतः वैसे मानवीय क्रियाकलाप जो अन्य जीवधारियों के लिए

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खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति

रोग प्रतिरोधकता के लिए पादप प्रजनन (Plant Breeding for Disease Resistance) – Class 12 Biology Notes in Hindi

रोग – प्रतिरोधकता के लिए पादप प्रजनन (plant breeding for disease resistance) :- उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसलों में जीवाणु, विषाणु तथा कवकों के कारण विभिन्न प्रकार के रोग होते हैं, जिससे फसल पैदावार में कमी हो जाती है। इसे बढ़ान के लिए रोग प्रतिरोधी फसल किस्मों के विकास पादप प्रजनन विधियों द्वारा

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जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत एवं प्रक्रम

DNA खंड का पृथक्करण तथा विलगन (Separation and Isolation of DNA) – Class 12 Biology Notes in Hindi

DNA खंड का पृथक्करण तथा विलगन (Separation and Isolation of DNA fragments) :- प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज द्वारा DNA को काटने के बाद उसका खंडन हो जाता है। इन खण्डों को जेल इलेक्ट्रोफॉरेसिस तकनीक द्वारा अलग करते हैं। चित्र :- जेल इलेक्ट्रोफॉरेसिस द्वारा DNA खंड का पृथक्करण।

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मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

सूक्ष्मजीव (Microbes) – Class 12 Biology Notes in Hindi

सूक्ष्मजीव (Microorganisms) :- मोनेरा, प्रोटिस्टा तथा फंजाई जगत के जीवों जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखे जाते हैं, वे सूक्ष्मजीव कहलाते हैं। जैसे – जीवाणु, प्रोटोजोआ, कवक, सूक्ष्म पादप तथा जंतु, विषाणु, प्रिओंस तथा प्रोटीन युक्त संक्रमणकर्ता।

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