आनुवंशिकी

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जीन अभिव्यक्ति का नियमन (Regulation of Gene Expression) – Class 12 Biology

जीन अभिव्यक्ति का नियमन (Regulation of Gene Expression) :- यह ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोशिकाएं यह तय करती हैं कि कौन से जीन को कब और कितना सक्रिय करना है। इस नियमन के फलस्वरुप पॉलिपेप्टाइड चैन या प्रोटीन का निर्माण होता है, जिसे कई स्तरों पर नियमित किया जाता है। सुकेंद्रकी या यूकैरियोटिक में […]

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आनुवंशिक पदार्थ DNA तथा उसका गुण

आनुवंशिक पदार्थ DNA :- आनुवंशिक पदार्थ DNA है, इसका सुस्पष्ट प्रमाण 1952 में अल्फ्रेड हर्षे तथा मार्था चेस (Alfred Hershey and Martha Chase) के एक प्रयोग से प्राप्त हुआ था। इन्होंने जीवाणुभोजी विषाणुओं (बैक्टीरियोफेज) पर प्रयोग किया, जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं। इन प्रयोगों में, उन्होंने दिखाया कि विषाणु का डीएनए ही जीवाणु कोशिका

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रूपांतरीय सिद्धांत तथा उसके जीव रासायनिक लक्षण

रूपांतरीय सिद्धांत (Transforming principle) :- 1928 में, फ्रेडरिक ग्रिफिथ (Frederick Griffith) ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनि (निमोनिया पैदा करने वाला जीवाणु) के दो प्रकारों (S-प्रभेद और R-प्रभेद) के साथ प्रयोग किया। इस प्रयोग से ग्रिफिथ ने रूपांतरीय सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार एक जीवाणु दूसरे जीवाणु से आनुवंशिक पदार्थ प्राप्त करके अपने गुणधर्मों को बदल सकता है.

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DNA कुंडली का पैकेजिंग कैसे होता है?

DNA कुंडली का पैकेजिंग (Packaging of DNA helix) :- DNA की लंबाई केंद्रक की लंबाई तथा चौड़ाई से बहुत अधिक होती है, केंद्रक के अंदर इसको विशेष रूप से व्यवस्थित होने की क्रिया को DNA कुंडली का पैकेजिंग कहते हैं। नोट – केंद्रक में कुछ जगहों पर क्रोमैटीन ढीले रूप में बंधे होते है, जिसे

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वंशावली विश्लेषण का वर्णन

वंशावली विश्लेषण (Pedigree Analysis) :- परिवार में कई पीढ़ियों तक लक्षणों के वंशागति का विश्लेषण करना वंशावली विश्लेषण कहलाता है। इसके अन्तर्गत एक विशेष लक्षण की पीढी – दर – पीढी होने वाली वंशगति को वंशावली वृक्ष (family tree) द्वारा दर्शाया जाता है। मानव आनुवंशिकी (human genetics) में वंशावली अध्ययन एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका

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बहुप्रभाविता / प्लियोट्रॉपी (Pleiotropy) क्या है?

बहुप्रभाविता / प्लियोट्रॉपी (Pleiotropy) :- जब जीवों में एकल जीन (single gene) द्वारा अनेक फीनोटाइप लक्षण प्रकट होते हैं, तब ऐसे जीन को प्लियोट्पिक जीन (Pleiotropic gene) कहते हैं तथा यह घटना बहुप्रभाविता / प्लियोट्रॉपी कहलाता हैं। जैसे – मनुष्य में Phenylketonuria, Sickle cell anaemia फेनिलकेटोनुरिया एक आनुवंशिक रोग है, जो एकल जीन में mutation

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बहुजीनी वंशागति / पॉलीजेनिक इनहेरिटेंस (Polygenic Inheritance) क्या है?

बहुजीनी वंशागति / पॉलीजेनिक इनहेरिटेंस (Polygenic Inheritance) :- जीवों में जब कोई लक्षण तीन या उससे अधिक जीनों (genes) द्वारा नियंत्रित होता है, तब उसे बहुजीनी लक्षण (polygenic trait) कहते हैं तथा इसकी वंशागति बहुजीनी वंशागति या पॉलीजेनिक इनहेरिटेंस कहलाती है। जैसे – मनुष्य में त्वचा, आँखों तथा बाल का रंग, ऊँचाई आदि। इसमें कई

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मेंडल के प्रयोग में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों (जीन, ऐलील, प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण, जीनोटाइप तथा फीनोटाइप आदि) की परिभाषा।

जीन (Gene) :- विशेष लक्षण के लिए आनुवंशिकि की मूलभूत इकाई को जीन कहते हैं। मेंडल ने जीन को कारक (फैक्टर) कहा था। कारक या जीन अपरिवर्तित रूप में जनक से संतति में युग्मकों के माध्यम से अगले पीढ़ियों में स्थानांतरित होती है। ऐलील या युग्मविकल्पी (Allele or allelomorph) :- विपरित लक्षणों के एक जोड़ा

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डीएनए प्रतिकरण / प्रतिकृति के मत क्या क्या हैं। डीएनए प्रतिकरण के अर्धसंरक्षी मत के बारे में बताएं।

डीएनए प्रतिकरण के मत :- (1). विक्षेपक मत (Dispersive theory) :- (2). संरक्षी मत (Conservative theory) :- (3). अर्धसंरक्षी मत (Semiconservative theory) :- इस मत को सिद्ध करने के लिए मैथ्यू स्टैनली मेसेल्सन तथा फ्रैंकलिन विलियन स्टाल के प्रयोग और टेलर के प्रयोग का वर्णन निम्नलिखित है :– मेसेल्सन तथा स्टाल के प्रयोग :– टेलर

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डाउन्स सिंड्रोम (Down’s Syndrome) तथा क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinfelter’s Syndrome) क्या होते है?

डाउन्स सिंड्रोम (Down’s Syndrome) :- जब किसी मनुष्य के 21वें जोड़े गुणसूत्र में एक गुणसूत्र की वृद्धि हो जाती है तब उस मनुष्य के अंदर डाउन्स सिंड्रोम नामक रोग उत्पन्न हो जाती है। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinfelter’s Syndrome) :-

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गुणसूत्रीय विकार क्या है? टर्नर्स सिंड्रोम क्या होता है।

गुणसूत्रीय विकार (Chromosomal Disorders) :- मानव शरीर में पाए जाने वाले 23 जोड़े गुणसूत्र की संख्या या संरचना में किसी प्रकार के परिवर्तन हो जाने से गुणसूत्रीय विकार उत्पन्न होता है। टर्नर्स सिंड्रोम :- जब मादा के द्विगुणित गुणसूत्रों की संख्या में से एक X – गुणसूत्र की कमी हो जाती है तब टर्नर्स सिंड्रोम

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