जीवविज्ञान

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जीवों में जनन

कीट परागण (Entomophily) क्या होता है। कीट परागित पुष्पों में अनुकुलन के बारे में बताएं।

कीट परागण (Entomophily) :- वैसे पुष्प जिसमें कीट द्वारा परागण होता है, उसे कीट परागित पुष्प कहा जाता है तथा पुष्प में इस प्रकार से होने वाले परागण को कीट परागण कहते हैं। कीट परागण के लिए मधुमक्खियां, तितलियां इत्यादि पुष्प से मकरंद (nectar) प्राप्त करने के लिए आकर्षित होते है। जैसे – प्राइमुला, यक्का […]

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जीवों में जनन

परागण (Pollination) क्या होता है। परागण कितने प्रकार के होते हैं। स्वपरागण अथवा परपरागण के लाभ और हानियां क्या क्या हैं। पुष्प की अवस्थाऐं के बारे में बताएं।

परागण (Pollination) :- जब परागकण परागकोष से निकलकर उसी पुष्प या उस जाति के दूसरे पुष्पों के वर्तिकाग्र तक पहुंचते हैं, तब इस क्रिया को परागण कहते हैं। परागकण नर जनन इकाई है जो परागकोष से उत्पन्न होते हैं, परागकोष के फटने से परागकण पुंकेसर से स्वतंत्र हो जाते हैं। परागण के प्रकार (Types of

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Diagram of the Parts of a Flower scaled
जीवों में जनन

पुष्पी पादपों मे लैंगिक जनन : विस्तृत विश्लेषण

पुष्पी पादपों मे लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants) :- पुष्पी पादपों मे लैंगिक जनन अंग उसका पुष्प होता है। पुष्प में पराग तथा अंडों का उत्पादन, परागण तथा निषेचन की क्रिया एवम बीज तथा फलों का विकास तथा प्रकीर्णन आदि कार्य संपन्न होते हैं। पुष्प की संरचना :- पुष्पी पादपों मे लैंगिक जनन

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जीवों में जनन

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) क्या है।लैंगिक जनन की अवस्थाएं तथा लाभ क्या क्या हैं।

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) :- जनन की वह विधि जिसमें किसी जाति के दो जीवों एक मादा तथा दूसरा नर भाग लेते हैं, इनके द्वारा नए संतति उत्पन्न होते हैं जो आनुवंशिक रूप से अपने जनकों से भिन्न होते हैं, उसे लैंगिक जनन कहते हैं। लैंगिक जनन लगभग सभी जीवधारियों में होते हैं, परंतु उच्च

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जीवों में जनन

अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) क्या है। अलैंगिक जनन की विधियाँ तथा लाभ क्या क्या हैं।

अलैंगिक जनन ( Asexual Reproduction) :- जनन की वह विधि जिसमें केवल एक ही जनक की आवश्यकता पड़ती है, इस प्रकार के जनन से प्राप्त संतति (Offspring) आनुवंशिक रूप से अपने जनक के समरूप होते हैं, वे अलैंगिक जनन कहलाते हैं। अलैंगिक जनन की विधियाँ (Methods of Asexual Reproduction) :- 1. विखंडन (Fission) :- अलैंगिक

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क्रमविकास

लामार्कवाद क्या है? लामार्कवाद की मुख्य बातें तथा आलोचनाएं। नव-लामार्कवाद पर टिपण्णी।

पृथ्वी पर जीवो का क्रमबद्ध विकास हुआ है। आधुनिक क्रमविकास के सिद्धांत डार्विन के प्राकृतिक चयन पर आधारित है किंतु इसके पूर्व अनेक विद्वानों के द्वारा जीवो के विकास से संबंधित अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किए गए जिन्हें वर्तमान में मान्यता प्राप्त नहीं हैं। क्रमविकास के सिद्धांतों में प्रमुख है लामार्कवाद तथा डार्विनवाद। लामार्कवाद (Lamarckism) :

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आनुवंशिकी

आनुवंशिकता, एकसंकर क्रॉस, द्विसंकर क्रॉस, मेंडल के वंशागति नियम तथा वंशागति के गुणसूत्रीय सिद्धांत का वर्णन।

आनुवंशिकता (Heredity) :- संतानो में पैतृक लक्षणों के संचरण को आनुवंशिकता कहते हैं। यह संचरण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जनकों से युग्मको (gametes ) के द्वारा होता है। आनुवंशिक लक्षण :- एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित होनेवाले लक्षण को पैतृक लक्षण या आनुवंशिक लक्षण कहलाते हैं। आनुवंशिकी (Genetics) :- जीव विज्ञान

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आनुवंशिकी

डीएनए प्रतिकरण की विधियां क्या क्या हैं। संतत एवं अर्धसंतत प्रतिकरण के बारे में बताएं।

डीएनए प्रतिकरण की विधियां (Methods of DNA Replication) :- डीएनए प्रतिकरण की विधियां निम्नलिखित हैं :– 1. प्रारंभन (Initiation) :- 2. कुंडली का खुलना (Unwinding of Helix) :- 3. प्राइमर स्ट्रैंड्स का निर्माण (Formation of Primer strands) :- 4. नए स्टैंड की लंबाई में वृद्धि (Elongation of new strand) :- संतत एवं अर्धसंतत प्रतिकरण (Continuous

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आनुवंशिकी

आरएनए क्या है? संरचना और प्रकार (RNA Structure & Types) – Class 12 Notes in हिंदी। (Print Pdf)

आरएनए (RNA) :- आरएनए (Ribonucleic acid) एक प्रकार का न्यूक्लिक अम्ल है जो कोशिका द्रव्य तथा केंद्रिका में पाया जाता है। आरएनए को प्रथम आनुवंशिक पदार्थ कहते हैं क्योंकि आवश्यक जैवप्रक्रमों जैसे – उपापचयी, स्थानांतरण (ट्रांसलेशन), संबंधन आदि का विकास (evolution) आरएनए से ही हुआ था। कार्य :- आरएनए (RNA) की संरचना :- आरएनए (RNA)

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डीएनए
आनुवंशिकी

न्यूक्लिक अम्ल तथा उसका प्रकार, न्युक्लियोसाइड तथा न्युक्लियोसाइड, डीएनए (DNA) की संरचना तथा उसका प्रकार का वर्णन।

न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acid) :- कोशिका के न्यूक्लियस में क्रोमोसोम के अंदर उपस्थित आनुवंशिक पदार्थ को न्यूक्लिक अम्ल कहते हैं। सन् 1869 में फ्रेडरिक मेशर (Friedrich Miescher) ने मवाद की कोशिका (pus cell) के न्यूक्लियस से न्यूक्लिक अम्ल का खोज किया था। मेशर ने उस अम्ल का नाम न्यूक्लिन (nuclein) रखा था। न्यूक्लिक अम्ल के

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आनुवंशिकी

DNA फिंगरप्रिंटिंग क्या है। DNA फिंगरप्रिंटिंग के क्या उपयोग हैं।

DNA फिंगरप्रिंटिंग :- मनुष्य के डीएनए में पाए जाने वाले क्षार अनुक्रम लगभग 99.9 % एक समान होते हैं, किंतु शेष डीएनए में विभिन्नताए होते हैं, इन विभिन्नताओं का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए जिस विधि का उपयोग किया जाता है उसे DNA फिंगरप्रिंटिंग कहते हैं। DNA फिंगरप्रिंटिंग की विधि :- 3. डीएनए को सीमा

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आनुवंशिकी

ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (Human Genome Project) या मानव जीनोम परियोजना क्या है। “HGP” के लक्ष्य, कार्य प्रणाली और मुख्य विशेषताएं क्या क्या हैं।

मानव कोशिका में उपस्थित सभी 46 क्रोमोसोम के संपूर्ण DNA अनुक्रम को पता लगाने, विभिन्न प्रकार के आनुवंशिक रोगों के निदान के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों ने सन् 1990 में एक परियोजना की कल्पना की जिसे ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट / मानव जीनोम परियोजना या HGP कहते हैं। यह योजना अप्रैल 2003 में पूर्ण हुई

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