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क्रमविकास

क्रमविकास के प्रमाण

क्रमविकास के प्रमाण (Evidences of Evolution) :- पृथ्वी पर जीवों के क्रमविकास के कई प्रमाण है। जैसे – जीवाश्म विज्ञान, भ्रूण विज्ञान, समजात अंग, असमजात अंग, प्राकृतिक चयन, मानवजनित क्रियाएँ आदि से मिले प्रमाण। 1. जीवाश्म विज्ञान से मिले प्रमाण (Palaeontological evidence) :- चट्टानों के अंदर जीवों के कठोर अवशेष को जीवाश्म (fossils) कहते हैं […]

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जीवों में जनन

जनसंख्या विस्फोट तथा इससे किसी देश या क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव

जनसंख्या विस्फोट ( Population explosion) :- किसी क्षेत्र या देश की जनसंख्या में अचानक और तीव्र वृद्धि होना जनसंख्या विस्फोट कहलाता है। यह तब होता है जब जन्म दर तेजी से बढ़ती है। मातृ मृत्यु दर (MMR -maternal mortality rate) तथा शिशु मृत्यु दर (IMR – infant mortality rate) कम होती है। भारत में जनसंख्या

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आनुवंशिकी

आनुवंशिक पदार्थ DNA तथा उसका गुण

आनुवंशिक पदार्थ DNA :- आनुवंशिक पदार्थ DNA है, इसका सुस्पष्ट प्रमाण 1952 में अल्फ्रेड हर्षे तथा मार्था चेस (Alfred Hershey and Martha Chase) के एक प्रयोग से प्राप्त हुआ था। इन्होंने जीवाणुभोजी विषाणुओं (बैक्टीरियोफेज) पर प्रयोग किया, जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं। इन प्रयोगों में, उन्होंने दिखाया कि विषाणु का डीएनए ही जीवाणु कोशिका

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आनुवंशिकी

रूपांतरीय सिद्धांत तथा उसके जीव रासायनिक लक्षण

रूपांतरीय सिद्धांत (Transforming principle) :- 1928 में, फ्रेडरिक ग्रिफिथ (Frederick Griffith) ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनि (निमोनिया पैदा करने वाला जीवाणु) के दो प्रकारों (S-प्रभेद और R-प्रभेद) के साथ प्रयोग किया। इस प्रयोग से ग्रिफिथ ने रूपांतरीय सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार एक जीवाणु दूसरे जीवाणु से आनुवंशिक पदार्थ प्राप्त करके अपने गुणधर्मों को बदल सकता है.

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आनुवंशिकी

DNA कुंडली का पैकेजिंग कैसे होता है?

DNA कुंडली का पैकेजिंग (Packaging of DNA helix) :- DNA की लंबाई केंद्रक की लंबाई तथा चौड़ाई से बहुत अधिक होती है, केंद्रक के अंदर इसको विशेष रूप से व्यवस्थित होने की क्रिया को DNA कुंडली का पैकेजिंग कहते हैं। नोट – केंद्रक में कुछ जगहों पर क्रोमैटीन ढीले रूप में बंधे होते है, जिसे

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आनुवंशिकी

वंशावली विश्लेषण का वर्णन

वंशावली विश्लेषण (Pedigree Analysis) :- परिवार में कई पीढ़ियों तक लक्षणों के वंशागति का विश्लेषण करना वंशावली विश्लेषण कहलाता है। इसके अन्तर्गत एक विशेष लक्षण की पीढी – दर – पीढी होने वाली वंशगति को वंशावली वृक्ष (family tree) द्वारा दर्शाया जाता है। मानव आनुवंशिकी (human genetics) में वंशावली अध्ययन एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका

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आनुवंशिकी

बहुप्रभाविता / प्लियोट्रॉपी (Pleiotropy) क्या है?

बहुप्रभाविता / प्लियोट्रॉपी (Pleiotropy) :- जब जीवों में एकल जीन (single gene) द्वारा अनेक फीनोटाइप लक्षण प्रकट होते हैं, तब ऐसे जीन को प्लियोट्पिक जीन (Pleiotropic gene) कहते हैं तथा यह घटना बहुप्रभाविता / प्लियोट्रॉपी कहलाता हैं। जैसे – मनुष्य में Phenylketonuria, Sickle cell anaemia फेनिलकेटोनुरिया एक आनुवंशिक रोग है, जो एकल जीन में mutation

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आनुवंशिकी

बहुजीनी वंशागति / पॉलीजेनिक इनहेरिटेंस (Polygenic Inheritance) क्या है?

बहुजीनी वंशागति / पॉलीजेनिक इनहेरिटेंस (Polygenic Inheritance) :- जीवों में जब कोई लक्षण तीन या उससे अधिक जीनों (genes) द्वारा नियंत्रित होता है, तब उसे बहुजीनी लक्षण (polygenic trait) कहते हैं तथा इसकी वंशागति बहुजीनी वंशागति या पॉलीजेनिक इनहेरिटेंस कहलाती है। जैसे – मनुष्य में त्वचा, आँखों तथा बाल का रंग, ऊँचाई आदि। इसमें कई

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आनुवंशिकी

मेंडल के प्रयोग में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों (जीन, ऐलील, प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण, जीनोटाइप तथा फीनोटाइप आदि) की परिभाषा।

जीन (Gene) :- विशेष लक्षण के लिए आनुवंशिकि की मूलभूत इकाई को जीन कहते हैं। मेंडल ने जीन को कारक (फैक्टर) कहा था। कारक या जीन अपरिवर्तित रूप में जनक से संतति में युग्मकों के माध्यम से अगले पीढ़ियों में स्थानांतरित होती है। ऐलील या युग्मविकल्पी (Allele or allelomorph) :- विपरित लक्षणों के एक जोड़ा

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जीवों में जनन

बंध्यता (Infertility) पर संक्षिप्त टिप्पणी।

बंध्यता (Infertility) :- असुरक्षित यौन संबंध के बाद भी जब स्त्री- पुरुष दंपति बच्चे पैदा नहीं कर सकते तब ऐसे दोष को बंध्यता (Infertility) कहते है। इसके कई कारण हो सकते है जैसे – शारिरिक, जन्मजात, रोग, ड्रग्स, प्रतिरक्षात्मक, मनोवैज्ञानिक आदि। सहायक प्रजनन तकनीक (Assisted reproductive techniques – ATS) द्वारा बंध्यता (Infertility) दोष दूर कर

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जीवों में जनन

मानव में निषेचन पश्च घटनाएं (विदलन, मोरुला, ब्लस्टोसिस्ट, अंतर्रोपन तथा भ्रूणीय विकास) का वर्णन।

विदलन या क्लीवेज (Cleavage) :- युग्मनज (zygote) जैसे ही इस्थमस से गर्भाशय की ओर बढ़ता है, mitotic division प्रारंभ हो जाता है, जिसे क्लीवेज या विदलन कहते हैं। विदलन में 2, 4, 8, 16 daughter cells बनता है जिन्हे कोरकखंड (ब्लास्टोमियर्स) कहते हैं। विदलन में भ्रूण का आकार नहीं बढ़ता हैं, केवल कोशिकाओं के संख्या

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जीवों में जनन

मानव में निषेचन का वर्णन।

मानव में निषेचन (Fertilization in human) :- एक शुक्राणु का एक अंडाणु के साथ संलयन (fusion), निषेचन कहलाता है। यह क्रिया मादा के अंडवाहिनी में ampulla क्षेत्र में होती है। संभोग (coitus) के दौरान शिश्न (penis) द्वारा वीर्य (semen) योनि में छोड़ा जाता है, जिसे insemination कहते हैं। Motile sperm तेजी से तैरते हुए गर्भग्रिवा

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