पुष्पी पादपों की बाह्य अकारिकी

In this Article

पुष्पी पादपों की बाह्य अकारिकी :-

पुष्पी पादपों की बाह्य आकारिकी (Morphology of Flowering Plants) में पुष्पी पौधों के बाह्य संरचना एवं रूपात्मक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है।

  • पुष्पी पादपों (Angiosperms) में जड़, तना, पत्ती, पुष्प, फल तथा बीज प्रमुख अंग होते हैं। इन अंगों का अध्ययन बाह्य अकारिकी के अंतर्गत होता है।

पुष्पी पादप का संगठन :-

एक सामान्य पुष्पी पादप दो भागों में विभाजित होता है –

  1. मूल /जड़ तंत्र (Root System) – सामान्यतः भूमि के भीतर।
  2. प्ररोह तंत्र (Shoot System) – भूमि के ऊपर स्थित भाग, जिसमें तना, पत्तियाँ, पुष्प एवं फल होते हैं।
1000299638

चित्र – पुष्पी पादपों की बाह्य अकारिकी।

मूल / जड़ (Root) :-

जड़ भ्रूण की मूलांकुर (Radicle) से विकसित होती है, जिसे प्राथमिक जड़ (Primary root) कहते हैं।

  • पार्श्व जड़ों को द्वितीय तथा तृतीय मूल या जड़ें कहते हैं।

जड़ के कार्य –

  • पौधे को मिट्टी में स्थिर रखना।
  • जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण।
  • भोजन का संचय।
  • वृद्धि नियामकों का निर्माण।

जड़ तंत्र के प्रकार :-

(क) मूसला जड़ तंत्र (Tap Root System) :-

मुख्य या प्राथमिक जड़ से विकसित पार्श्व जड़ों को मूसला मूलतंत्र कहते हैं। द्विबीजपत्री पौधों में पाई जाती है। उदाहरण: सरसों, मटर

(ख) रेशेदार जड़ तंत्र (Fibrous Root System) :-

मुख्य जड़ अल्पकाल में नष्ट हो जाती है।अनेक समान आकार की जड़ें विकसित होती हैं।एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है। उदाहरण: गेहूँ, धान

(ग) अपस्थानिक जड़ (Adventitious Root) :-

मूलांकुर के अतिरिक्त अन्य भागों से विकसित होती है। उदाहरण: बरगद, घास।

1000299639

जड़ों के रूपांतरण (Modification of Roots) :-

1. भोजन संचय हेतु

  • शंकुकार मूसला मूल – गाजर
  • कंदाकार अपस्थानिक मूल – शकरकंद
  • नापीफॉर्म / कुंभी रूपी मूसला मूल – शलजम

2. यांत्रिक सहारा हेतु

  • स्तंभ जड़ / प्रोप रूट – बरगद
  • अवलम्ब जड़ – मक्का

3. श्वसन हेतु

  • श्वसन मूल (Respiratory Roots) – राइजोफोरा।

जड़ के क्षेत्र :-

1000299640

चित्र – मूल की बाह्य अकारिकी।

  1. मूलगोप (Root Cap) – मूल का शीर्ष भाग, मूल शीर्ष की रक्षा करता है।
  2. विभज्योतक क्षेत्र (Meristematic region) – मूल गोप के ठीक उपर स्थित, जिसकी कोशिकाएं विभाजित होती है।
  3. दीर्घीकरण क्षेत्र (Elongation region) – विभज्योतक क्षेत्र की कोशिकाएं शीघ्रता से मूल की लंबाई में वृद्धि करती है, जिन्हे दीर्घीकरण क्षेत्र कहते हैं।
  4. परिपक्वता क्षेत्र (Root Hair Zone) – दीर्घीकरण क्षेत्र का भाग जहाँ की कोशिकाओं में विविधता तथा परिपक्वता आती है।
  5. मूल रोम (Root hairs) – परिपक्वता क्षेत्र से निकली धागे जैसी रचनाएँ जो मिट्टी से जल तथा खनिज लवण अवशोषण करते हैं।

तना (Stem):-

तना भ्रूण के प्रांकुर (Plumule) से विकसित होता है।

तने की विशेषताएँ –

  • गाँठ (Node) उपस्थित – तने का वह भाग जहाँ से पतियाँ, शाखाएँ और फूल निकलती है वह गाँठ कहलाती है। गांठें अंतस्थ अथवा कक्षीय हो सकती है।
  • अंतरगाँठ (Internode) उपस्थित – पौधे के तने पर स्थित दो लगातार ‘गांठों’ (Nodes) के बीच का हिस्सा होता है।
  • तने प्रकाश की ओर वृद्धि करते है (धनात्मक प्रकाशानुवर्तन)।

तने के कार्य :-

  • सहारा प्रदान करना।
  • जल एवं भोजन का परिवहन करना।
  • प्रकाश संश्लेषी पदार्थो का संवहन करना।
  • भोजन संचय करना।
  • कायिक प्रवर्धन में भाग लेना।

तने के रूपांतरण :-

भूमिगत तने – भोजन संचय के लिए रूपांतरित होता है।

प्रकार उदाहरण

प्रकंद (Rhizome) – अदरक

कंद (Tuber) – आलू

शल्ककंद (Bulb) – प्याज

घनकंद (Corm) – अरबी

1000301603

उपरिभूमि तने – भूमि पर फैलत हैं। पुराने पौधों के मरने के बाद ऐसे तने से नये पौधे बनते हैं।

रनर – दूब घास

स्टोलोन – स्ट्रॉबेरी

वायवीय तने – वायवीय वृद्धि करते हैं।

काँटा – नींबू, बोगनविलिया

प्रतान (Tendril) – पतला तथा कुंडलित। उदाहरण – अंगूर, खीरा, घीया, तरबूज

पत्ती (Leaf) :-

पत्ती तने की गाँठ से उत्पन्न पार्श्वीय संरचना है। शीर्षस्थ विभाज्योत्तक (apical meristem) से निकलती है।

पत्ती के कार्य : –

  • प्रकाश संश्लेषण – कोशिका में क्लोरोफिल के कारण
  • वाष्पोत्सर्जन – पत्तियों पर स्थित रंध्र या (stomata) द्वारा।
  • गैसीय विनिमय – stomata द्वारा।

पत्ती के भाग :-

  1. पर्णाधार (Leaf Base) – इसकी सहायता से पत्ती तने से जुड़ी होती है।
  2. वृन्त (Petiole) – लंबा, पतला, लचीला जो पत्ती को हवा में हिलाता रहता है।
  3. पर्णफलक (Lamina) / स्तरिका – पत्ती का सबसे चौड़ा, चपटा और हरा भाग होता है, जिसमें शिराएँ, शिरिकाएं तथा बीच में मध्यशिरा होता है। ये पत्ती को दृढता प्रदान करने, जल, खनिज लवण तथा भोजन स्थानांतरण करने में भाग लेते हैं।
1000299641

चित्र – पत्तियों की बाह्य अकारिकी।

पत्तियों के शिराविन्यास (Venation) :-

  1. जालिकावत शिराविन्यास (Reticulate) – द्विबीजपत्रियों में शिराएँ जाल बनाती हैं। उदाहरण: आम
  2. समानांतर शिराविन्यास (Parallel) – एकबीजपत्रियों में शिराएँ समानांतर होती हैं। उदाहरण: गेहूँ

पत्तियों के प्रकार :-

  1. सरल पत्ती (Simple Leaf) :- पर्णफलक अविभाजित होता है। उदाहरण: आम
  2. संयुक्त पत्ती (Compound Leaf) :- पर्णफलक कई पत्रकों में विभाजित होता है।
  3. पिच्छाकार संयुक्त पत्ती :- उदाहरणनीम
  4. हस्ताकार संयुक्त पत्ती। उदाहरण :- सिल्क कॉटन

पर्णविन्यास (Phyllotaxy) :-

  1. वैकल्पिक (Alternate) – एक गाँठ पर एक पत्ती। उदाहरण: सरसों
  2. सम्मुख (Opposite) – एक गाँठ पर दो पत्तियाँ। उदाहरण: अमरूद
  3. चक्रिक (Whorled) – एक गाँठ पर तीन या अधिक पत्तियाँ। उदाहरण: कनेर
1000299642

पुष्पक्रम (Inflorescence) :-

तने पर पुष्पों की व्यवस्था को पुष्पक्रम कहते हैं।

प्रकार

() असीमाक्षी (Racemose) – मुख्य अक्ष बढ़ता रहता है। पुराने पुष्प नीचे, नए ऊपर।

() ससीमाक्षी (Cymose) – मुख्य अक्ष पुष्प बनाकर वृद्धि रोक देता है। पुराने पुष्प ऊपर, नए नीचे।

1000301627

पुष्प (Flower) :-

पुष्प लैंगिक जनन की संरचना है।

पुष्प के भाग – पुष्प की फूले हुए पुष्पावृंत (पुष्पासन) पर लगे पुष्प के मुख्य चार भाग होते हैं –

  1. बाह्यदलपुंज (Calyx), 2. दलपुंज (Corolla), 3. पुंकेसरचक्र (Androecium) तथा 4. अंडपचक्र (Gynoecium)
1000301630

चित्र – पुष्प की बाह्य अकारिकी।

पुष्पों के प्रकार :-

  1. पूर्ण पुष्प – चारों चक्र उपस्थित।
  2. अपूर्ण पुष्प – एक या अधिक चक्र अनुपस्थित।

पुष्प की सममिति :-

  1. त्रिज्यसममिति / नियमित (Actinomorphic) – कई तलों से समान भागों में बाँटा जा सके। उदाहरण: सरसों, धतूरा, मिर्च।
  2. द्विपार्श्व सममिति (Zygomorphic) – केवल एक तल से समान भाग में बाँट सकते हैं। उदाहरण: मटर, गुलमोहर, सेम, केसिया।
  3. अनियमित (Asymmetrical) – किसी भी तल से समान भागों में बाँट नहीं सकते। उदाहरण : केना।

अंडाशय की स्थिति : –

  1. अधोजायंगता (Hypogynous) / ऊर्ध्वस्थ अंडाशय (Superior Ovary) :- जायांग सर्वोच्च स्थान पर स्थित, अंडाशय उपर तथा अन्य भाग नीचे की और स्थित। उदाहरण: सरसों, गुड़हल, बैंगन।
  2. अधिजायांगता (epigynous) / अधःस्थ अंडाशय (Inferior Ovary) :- फूल के अन्य भाग अंडाशय के उपर स्थित। उदाहरण: अमरूद, खीरा।
  3. परिजायंगता (Perigynous) :- अंडाशय मध्य भाग में स्थित। उदाहरण : गुलाब, आड़ू।
1000301629

बाह्यदलपुंज (Calyx) :-

सबसे बाहरी चक्र जो बाह्यदल (Sepals) से बना होता है। हरे पतियों की तरह होते हैं। कलिका की रक्षा करता है।

दो प्रकार –

  1. पृथक् बाह्यदली (Polysepalous) – बाह्यदल स्वतंत्र।
  2. संयुक्त बाह्यदली (Gamosepalous) – बाह्यदल जुड़े हुए।

दलपुंज (Corolla): –

पंखुड़ियों से बना होता है। चमकीले तथा रंगीन होते हैं।

  • आकृति – नलिकाकार, घंटाकार, कीप के आकृति के तथा चक्रकार हो सकते हैं।
  • परागण कर्ताओं को आकर्षित करता है।

प्रकार –

  1. पृथक् दल (Polypetalous) – पंखुड़ियाँ स्वतंत्र।
  2. संयुक्त दल (Gamopetalous) – पंखुड़ियाँ जुड़ी होती हैं।

पुष्पदल विन्यास / एस्टिवेशन (Aestivation) : –

कलिका अवस्था में दलों की व्यवस्था को पुष्पदल विन्यास कहते हैं।

प्रकार –

  1. कोरस्पर्शी / वल्वेट (Valvate) :- किनारे केवल स्पर्श करते हैं। उदाहरण – आक
  2. व्यावर्तित / ट्विस्टेड (Twisted) :- एक किनारा दूसरे को ढकता है। उदाहरण – गुड़हल, भिंडी, कपास
  3. कोरछादी / इम्ब्रिकेट (Imbricate) :- अनियमित अध्यारोपण होता है। उदाहरण – कैसिया, गुलमोहर
  4. वेक्सिलरी (Vexillary) :- पांच दल होते हैं। सबसे बड़े को मानक, दो पार्श्वीय को पंख तथा अन्य दो छोटे को कूटक कहते हैं। – उदाहरण: मटर, सेम
1000301628

पुंकेसरचक्र (Androecium) :-

  • यह नर जनन अंग है। पुंकेसरों से बनता है।
  • पुंकेसर (stamen) के भाग – तंतु (Filament), परागकोश (Anther)
  • परागकोश द्विपाली होते है। प्रत्येक पाली के दो कोष्ठकों में परागकण पाए जाते हैं।
  • पुंकेसर दललग्न (एपिपेटालस) तथा परिदललग्न (एपीफिलस) होते हैं।

पुंकेसरों का संयोजन :-

  • एकबंधु (Monadelphous) :- पुंकेसर एक गुच्छे या बंडल में।उदाहरण – गुड़हल
  • द्विबंधु (Diadelphous) :- दो बंडल में। उदाहरण – मटर
  • बहुबंधु (Polyadelphous) :- दो से अधिक बंडल में। उदाहरण – साइट्रस

अंडपचक्र / जायांग (Gynoecium) :-

  • यह मादा जनन अंग है। एक या एक से अधिक अंडप / स्त्रीकेसर (carpel) से बनते हैं।
अंडप के भाग : –
  1. वर्तिकाग्र (Stigma) – वर्तिका की चोटी पर स्थित जो परागकण ग्रहण करती है।
  2. वर्तिका (Style) – अंडाशय के उपर लंबी नली जो अंडाशय को वर्तिकाग्र से जोड़ती है।
  3. अंडाशय (Ovary) – अंडप का आधारी तथा फुला भाग जहाँ एक या एक से अधिक बीजांड होते हैं।

अंडपो के प्रकार :-

  • वियुक्तांडपी (एपोकार्पस) : – अंडप मुक्त या स्वतंत्र होते हैं। उदाहरण – गुलाब, कमल
  • युक्तांडपी (सिनकार्पस) :– अंडप जुड़े होते हैं। उदाहरण – मटर, टमाटर

निषेचन के बाद बीजांड से बीज तथा अंडाशय से फल बनता है।

बीजांडन्यास (Placentation) :-

अंडाशय में बीजांड के लगे रहने का क्रम को बीजांडन्यास कहते हैं।

1000301631

प्रकार उदाहरण

सीमांत (Marginal) – मटर

स्तम्भीय / अक्षीय (Axile) – टमाटर, नींबू, गुड़हल

भितिय / परिधीय (Parietal) – सरसों

मुक्त स्तम्भीय / केंद्रीय (Free Central) – डायन्थस

आधारी (Basal) – सूर्यमुखी, गेंदा

फल (Fruit) :-

निषेचन के बाद अंडाशय फल में परिवर्तित हो जाता है।

फल के भाग :- 1. फल भिति (pericarp) तथा 2. बीज (seed)

1. फलभित्ति (Pericarp) : –

फल भिति शुष्क अथवा गूदेदार होती है। इसके तीन भाग होते हैं –

बाह्यफल भिति (epicarp) – सबसे बाहर

मध्यफल भिति (mesocarp) – मध्य भाग

अंतःफल भिति (endocarp) – सबसे अंदर

1000301632
  • आम और नारियल मे फल अस्ठिल होता है। ये फल एकांडपी (एक अंडप) अंडाशय से विकसित होते हैं। इनमें एक बीज बनता है।
  • आम में मध्यफल भिति गूदेदार तथा खाने योग्य जबकि अंतः भिति कठोड़ होता है।
  • नारियलमें मध्यफल भिति रेशेदार होती है।

2. बीज (Seed) :-

बीज निषेचित बीजांड से बनता है। इसमें प्रायः बीजावरण तथा भ्रूण होता है।

भ्रूण में एक मूलांकुर, एक भ्रूणीय अक्ष, एक या दो बीज पत्र होता हैं।

द्विबीजपत्री बीज की संरचना (structure of dicot seeds) :-

  • बीजावरण :- बीज की बाहरी परत को बीजावरण कहते हैं। इसके बाहरी सतह को बीजचोल, तथा भीतरी सतह टेगमेन के कहते हैं।
  • बीजांडद्वार :- बीज में नाभिका के ऊपर स्थित छिद्र को बीजांडद्वार कहते हैं।
  • भ्रूणीय अक्ष के नीचे नुकीले भाग को मूलांकुर तथा ऊपरी पत्तीदार भाग को प्रांकुर कहते हैं।
  • भ्रूणपोष : द्विनिषेचन से बनता है, भोजन संग्रह करता है। चना, मटर, सेम का भ्रूणपोष पतला तथा अभ्रूणपोषी जबकि अरंड का गूदेदार तथा भ्रूण पोषी कहलाता है।
1000301634

एकबीजपत्री बीज की संरचना :-

  • एक ही बड़ा बीजपत्र जो स्कुटेलम कहलाता है।
  • प्रायः भ्रूणपोषी किंतु कुछ अभ्रूणपोषी होते हैं।
  • प्रांकुर तथा मूलांकुर क्रमशः प्रांकुरचोल तथा मूलांकुरचोल से ढका होता है।

उदाहरण: मक्का – बीजावरण झिल्लिदार।

1000301633

चित्र – एकबीजपत्री बीज।

आवृतबीजी (Angiosperms) के कुछ महत्वपूर्ण कुल (Families) :-

1. फैबेसी कुल (Fabaceae / Papilionaceae) :-

  • यह दलहनी पौधों का कुल है। इसमें शाक, झाड़ी या वृक्ष शामिल है।
  • मूसला जड़ तथा जड़ ग्रंथियाँ (Root nodules) पाई जाती हैं
  • पत्तियाँ संयुक्त एवं वैकल्पिक होती हैं।
  • पुष्प उभयलिंगी तथा द्विपार्श्व सममित (Zygomorphic) होते हैं।
  • पुंकेसर 10 होता है।
  • दलविन्यास (Aestivation) वेक्सिलरी होता है।
  • अंडाशय ऊर्ध्वस्थ (Superior Ovary)।
  • फल फली (Legume) होता है।
    उदाहरण – मटर, चना, अरहर, मूंग, सोयाबीन

2. सोलेनेसी कुल (Solanaceae) :-

  • यह खाद्य एवं औषधीय पौधों का महत्वपूर्ण कुल है। इनमें शाक, झाड़ी या छोटे वृक्ष शामिल होते हैं।
  • पत्तियाँ सरल एवं वैकल्पिक।
  • पुष्प नियमित (Actinomorphic) तथा उभयलिंगी।
  • दल संयुक्त (Gamopetalous)।
  • पुंकेसर 5 तथा दलों से जुड़े (Epipetalous)।
  • अंडाशय ऊर्ध्वस्थ एवं द्विकर्पली।
  • फल बेरी (Berry) या कैप्सूल।
    उदाहरण – आलू, टमाटर, बैंगन, तम्बाकू, मिर्च

3. लिलिएसी कुल (Liliaceae) :-

  • यह एकबीजपत्री पौधों का प्रमुख कुल है।
  • बहुवर्षीय शाकीय पौधे।
  • रेशेदार जड़ें।
  • पत्तियों में समानांतर शिराविन्यास।
  • पुष्प नियमित एवं त्रिसंख्यी (Trimerous)।
  • परिदल (Perianth) 6 (3+3)।
  • पुंकेसर 6।
  • अंडाशय ऊर्ध्वस्थ एवं त्रिकर्पली।
  • फल कैप्सूल या बेरी।
    उदाहरण – लिली, एलोवेरा, प्याज, लहसुन, एस्पैरागस
    बिहार बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण MCQs
    1. जड़ ग्रंथियाँ किस कुल में पाई जाती हैं?
    (A) Solanaceae (B) Fabaceae (C) Liliaceae (D) Poaceae उत्तर: (B) Fabaceae
    2 आलू किस कुल का सदस्य है?
    (A) Fabaceae (B) Solanaceae (C) Liliaceae (D) Brassicaceae उत्तर: (B) Solanaceae
    3. लिली में पुंकेसरों की संख्या होती है—
    (A) 5 (B) 4 (C) 6 (D) 10 उत्तर: (C) 6
    4. मटर का फल कहलाता है—
    (A) बेरी (B) फली (C) कैप्सूल (D) साइप्सेला उत्तर: (B) फली
    5. समानांतर शिराविन्यास किस कुल की विशेषता है?
    (A) Fabaceae (B) Solanaceae (C) Liliaceae (D) Rosaceae उत्तर: (C) Liliaceae


बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. Fabaceae कुल की विशेषताओं का वर्णन कीजिए
  2. Solanaceae कुल का पुष्पीय विवरण लिखिए।
  3. Liliaceae कुल की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

महत्वपूर्ण MCQs

1. रेशेदार जड़ तंत्र किसमें पाया जाता है?

(A) सरसों (B) मटर (C) गेहूँ (D) आम उत्तर: (C)

2. समानांतर शिराविन्यास पाया जाता है—

(A) आम (B) पीपल (C) गेहूँ (D) गुलाब उत्तर: (C)

3. आलू किसका रूपांतरण है?

(A) जड़ (B) तना (C) पत्ती (D) पुष्प उत्तर: (B)

4. अदरक का खाद्य भाग है—

(A) प्रकंद (B) जड़ (C) फल (D) बीज उत्तर: (A)

5. पत्तियों की व्यवस्था को कहते हैं—

(A) Venation (B) Phyllotaxy (C) Aestivation (D) Placentation उत्तर: (B)

6. मटर में किस प्रकार का पुष्पविन्यास पाया जाता है?

(A) Vexillary (B) Valvate (C) Twisted (D) Imbricate उत्तर: (A)

7. गुड़हल में पुंकेसर होते हैं—

(A) Diadelphous (B) Polyadelphous (C) Monadelphous (D) Epiphyllous उत्तर: (C)

8. टमाटर में बीजांडन्यास होता है—

(A) Marginal (B) Axile (C) Basal (D) Parietal उत्तर: (B)

9. मक्का का बीज है—(A) द्विबीजपत्री(B) एकबीजपत्री (C) नग्नबीजी (D) बीजरहित उत्तर: (B)

10. बरगद में पाई जाने वाली जड़ें कहलाती हैं—

(A) श्वसन जड़ (B) स्तंभ जड़ (C) रेशेदार जड़ (D) कंदमूल उत्तर: (B) स्तंभ जड़

11. श्वसन जड़ें किस पौधे में पाई जाती हैं?

(A) गाजर (B) आम (C) मैंग्रोव (D) मटर उत्तर: (C) मैंग्रोव

12. प्याज का खाद्य भाग है—

(A) प्रकंद (B) शल्ककंद (Bulb) (C) कंद (D) जड़ उत्तर: (B) शल्ककंद

13. प्रतान (Tendril) का कार्य है—

(A) भोजन संचय (B) जल अवशोषण (C) सहारा प्राप्त करना (D) प्रकाश संश्लेषण उत्तर: (C) सहारा प्राप्त करना

14. निम्नलिखित में से कौन-सा तने का रूपांतरण है?

(A) गाजर (B) मूली (C) आलू (D) शकरकंद उत्तर: (C) आलू

15. आम में किस प्रकार का पर्णविन्यास पाया जाता है?

(A) चक्रिक (B) सम्मुख (C) वैकल्पिक (D) समानांतर उत्तर: (C) वैकल्पिक

16. अमरूद में पर्णविन्यास होता है— (A) सम्मुख (B) वैकल्पिक (C) चक्रिक (D) जालिकावत उत्तर: (A) सम्मुख

17. कनेर में किस प्रकार का पर्णविन्यास पाया जाता है?

(A) वैकल्पिक (B) सम्मुख (C) चक्रिक (D) समानांतर उत्तर: (C) चक्रिक

18. मटर की पत्ती किस प्रकार की होती है?

(A) सरल (B) हस्ताकार संयुक्त (C) पिच्छाकार संयुक्त (D) शल्क पत्ती उत्तर: (C) पिच्छाकार संयुक्त

19. गुड़हल में किस प्रकार का एस्टिवेशन पाया जाता है?

(A) वल्वेट (B) ट्विस्टेड (C) वेक्सिलरी (D) इम्ब्रिकेट उत्तर: (B) ट्विस्टेड

20. आक (Calotropis) में एस्टिवेशन होता है— (A) वल्वेट (B) ट्विस्टेड (C) वेक्सिलरी (D) इम्ब्रिकेट उत्तर: (A) वल्वेट

21. कमल में अंडपों की अवस्था होती है— (A) सिंकार्पस (B) अपोकार्पस (C) अक्षीय (D) पार्श्वीय उत्तर: (B) अपोकार्पस

22. सरसों में किस प्रकार का बीजांडन्यास पाया जाता है?

(A) Marginal (B) Axile (C) Basal (D) Parietal उत्तर: (D) Parietal

23. सूर्यमुखी में किस प्रकार का बीजांडन्यास पाया जाता है? (A) Basal (B) Axile (C) Marginal (D) Free Central उत्तर: (A) Basal

24. निषेचन के बाद बीजांड किसमें परिवर्तित होता है?

(A) फल (B) बीज (C) अंडाशय (D) भ्रूणपोष उत्तर: (B) बीजबिहार

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

  1. मूसला जड़ एवं रेशेदार जड़ में दो अंतर लिखिए।
  2. अपस्थानिक जड़ क्या है? उदाहरण दीजिए।
  3. जड़ के चार क्षेत्रों के नाम लिखिए।
  4. तने के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
  5. सरल एवं संयुक्त पत्ती में अंतर लिखिए।
  6. जालिकावत एवं समानांतर शिराविन्यास में अंतर बताइए।
  7. पर्णविन्यास (Phyllotaxy) क्या है? इसके प्रकार लिखिए।
  8. असीमाक्षी एवं ससीमाक्षी पुष्पक्रम में अंतर लिखिए।
  9. बाह्यदलपुंज एवं दलपुंज के कार्य लिखिए।
  10. ऊर्ध्वस्थ एवं अधःस्थ अंडाशय में अंतर बताइए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

  1. जड़ तंत्र के प्रकारों का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
  2. जड़ों के विभिन्न रूपांतरणों का वर्णन उपयुक्त चित्र सहित कीजिए।
  3. पत्ती की संरचना का वर्णन कीजिए तथा सरल एवं संयुक्त पत्ती में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. पुष्प की संरचना का वर्णन करते हुए उसके चारों चक्रों का विवरण दीजिए।
  5. पुंकेसरचक्र एवं अंडपचक्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
  6. बीजांडन्यास (Placentation) क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
  7. द्विबीजपत्री एवं एकबीजपत्री बीज की संरचना में अंतर लिखिए।

What did you think of this article?

Scroll to Top